Monday, February 23, 2009

तुम्हारी हँसी

चोंक जाती है
हर आहट पर
मेरी अनकही खामोशी
तुम्हारी
सोंधी सी हँसी
बिखर जाती है
पलाश के फूलों की तरह
मेरे हिरदे आँगन में
देने को मुझे आमंतरण
तुम्हारी
भीगी सी हँसी के आमंतरण से
बिंध जाता है
मेरा हर सन्नाटा
और
बह उठती हूँ मैं
मदमाते झरने सी ...

1 comment:

  1. dil main bheetar tak utar gai tumari panktiyan...pyaar kya isi ka naam hai ????

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