Sunday, October 11, 2009

भारतीय चूल्हा : जो माँ ने मेरे लिए बनवाया था


ओडिसा में पापा के घर के पिछले हिस्से में बना चूल्हा जो मेरी इन्तजार में चटक गया !

15 comments:

  1. आपने इतना बढ़िया रचना लिखा है कि मेरे पास अल्फाज़ नहीं है कहने के लिए!

    sanjay bhaskar
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  2. kabile tarif

    sanjay bhaskar
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  3. प्रिये मित्र आपका ब्लॉग अच्छा लगा आपका विषये सही है मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ कृपया इसे भी पढें और बताएं कि कैसा है और इसके बारे मैं सुझाव भी दें धन्येवाद .

    ह्त्त्प://व्व्व.आइना-इ-वक़्त.ब्लागस्पाट.com

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  4. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
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  5. मन की बात गहरे bhaw से likhi है आपने. निरंतर लेखन जारी रखें.

    धन्यवाद!

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  7. आपका हार्दिक स्वागत है.
    आपके ब्लाग लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

    यहाँ भी आयें आपका स्वागत है,
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  8. hmm.. aise hi na jane kitne arman aur khwab ya to tadak jate hain ya chatak jate hain...... yahi to life hai...

    shubhkamnao k sath swagat hai blog jagat par

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  9. urs most welcome here.please visit-http://kvitakalash.blogspot.com/

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  10. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....

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  11. Bahut barhia... aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye

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  12. ये पोस्ट कई मायनों में सुखद है, लगता है भौतिक युग में भी संस्कृति के अवशेष अभी बचे हुए हैं.

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  13. गीत बहुत खूबसूरत है, कई शब्दों से रचे बिम्ब तो बहुत प्रभावी संप्रेषण कर रहे हैं.

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