Posts
मन की ग़ज़ल
- Get link
- X
- Other Apps
"मन "की यह ग़ज़ल मुझे ऐसी लगती है कि मैंने कही हो , आप भी देखिये :----- कुछ वो पागल है कुछ दीवाना भी । उसको जाना, मगर न जाना भी । यूँ तो हर शय में सिर्फ़ वो ही वो , कितना मुश्किल है उसको पाना भी । उसके अहसास को जीना हर पल यानी, अपने को भूल जाना भी । उस से मिलना , उसी का हो जाना वो ही मंजिल वही ठिकाना भी । आज पलकों पे होंठ रख ही दो , आज मौसम है कुछ , सुहाना भी ।